
रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध ने एक बार फिर नया और भयावह मोड़ ले लिया है। यूक्रेन द्वारा मॉस्को पर किए गए अब तक के सबसे बड़े ड्रोन हमलों में से एक के बाद रूसी राजधानी के कई इलाकों में कथित तौर पर “काली बारिश” (Black Rain) देखने को मिली। स्थानीय निवासियों ने शिकायत की कि आसमान से गिरने वाली बूंदों ने कारों, खिड़कियों और कपड़ों पर काले रंग का चिपचिपा अवशेष छोड़ दिया, जिससे लोगों में दहशत फैल गई।
रिपोर्टों के अनुसार यूक्रेनी ड्रोन हमलों का मुख्य निशाना मॉस्को के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में स्थित एक महत्वपूर्ण तेल रिफाइनरी थी। हमले के बाद रिफाइनरी में भीषण आग लग गई और आसमान में काले धुएं के विशाल गुबार फैल गए। कई घंटों तक धुआं शहर के ऊपर छाया रहा, जिसके बाद कुछ इलाकों में तेल और कालिख मिश्रित बूंदें गिरने की शिकायतें सामने आईं।
प्रत्यक्षदर्शियों ने सोशल मीडिया पर तस्वीरें और वीडियो साझा किए, जिनमें वाहनों और इमारतों पर काले रंग की परत जमी दिखाई दी। कुछ स्थानीय लोगों ने इसे “ब्लैक रेन” बताया, जबकि अधिकारियों ने इस दावे को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी। हालांकि पर्यावरण और स्वास्थ्य एजेंसियों ने लोगों को खिड़कियां बंद रखने और विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों तथा सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी।
यह हमला यूक्रेन द्वारा मॉस्को पर किए गए सबसे बड़े ड्रोन अभियानों में गिना जा रहा है। यूक्रेनी राष्ट्रपति Volodymyr Zelenskyy ने कहा कि यदि यूक्रेन लगातार हमलों का सामना करेगा तो रूस को भी उसके परिणाम भुगतने होंगे। वहीं रूस ने दावा किया कि उसने सैकड़ों ड्रोन मार गिराए, लेकिन इसके बावजूद कई महत्वपूर्ण ठिकानों को नुकसान पहुंचा।
हमले के कारण मॉस्को के कई हवाई अड्डों पर उड़ान संचालन प्रभावित हुआ। कुछ समय के लिए विमानों की आवाजाही रोकनी पड़ी और सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया। रूसी अधिकारियों के अनुसार हमलों में कई लोग घायल हुए, जबकि ऊर्जा अवसंरचना को भी नुकसान पहुंचा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि तेल रिफाइनरी में लगी आग से उठी भारी मात्रा में कालिख, तेल कण और धुएं ने वातावरण में प्रदूषण बढ़ा दिया। इसी कारण कुछ क्षेत्रों में काले रंग की बूंदों जैसी स्थिति पैदा हुई हो सकती है। हालांकि “काली बारिश” की वैज्ञानिक पुष्टि को लेकर अभी भी विस्तृत जांच जारी है।
यह हमला ऐसे समय हुआ है जब यूक्रेन रूस की ऊर्जा अवसंरचना को निशाना बनाकर युद्ध की आर्थिक लागत बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रहा है। मॉस्को की यह रिफाइनरी राजधानी और आसपास के क्षेत्रों के लिए ईंधन आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण केंद्र मानी जाती है।
रूस-यूक्रेन युद्ध के चार साल से अधिक समय बाद अब संघर्ष केवल सीमावर्ती इलाकों तक सीमित नहीं रह गया है। ड्रोन तकनीक के बढ़ते उपयोग ने युद्ध को रूस के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले क्षेत्रों तक पहुंचा दिया है। मॉस्को में कथित “काली बारिश” की घटना इसी बदलते युद्ध परिदृश्य का नया और चिंताजनक उदाहरण मानी जा रही है।