
कोलंबिया के राष्ट्रपति चुनाव ने इस समय पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। चुनाव के पहले दौर में दक्षिणपंथी नेता और मशहूर वकील एबेलार्डो डी ला एस्प्रिएला ने बढ़त हासिल कर राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। ‘एल टाइगर’ यानी ‘द टाइगर’ के नाम से लोकप्रिय डी ला एस्प्रिएला को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों का समर्थक माना जाता है और अब उनकी चुनावी सफलता को लैटिन अमेरिका की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
हालांकि किसी भी उम्मीदवार को पूर्ण बहुमत नहीं मिला है, इसलिए अब चुनाव दूसरे दौर में जाएगा। शुरुआती नतीजों के अनुसार डी ला एस्प्रिएला लगभग 44 प्रतिशत वोट हासिल करने में सफल रहे, जबकि उनके मुख्य प्रतिद्वंद्वी और वामपंथी नेता इवान सेपेदा को करीब 41 प्रतिशत समर्थन मिला। अब दोनों नेताओं के बीच रनऑफ चुनाव होगा, जो कोलंबिया की राजनीतिक दिशा तय करेगा।
एबेलार्डो डी ला एस्प्रिएला का उभार कई राजनीतिक विशेषज्ञों के लिए भी चौंकाने वाला माना जा रहा है। कुछ महीने पहले तक चुनावी सर्वेक्षणों में वे पीछे दिखाई दे रहे थे, लेकिन जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आया, उनकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी। उन्होंने खुद को एक सख्त नेता और अपराध के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने वाले उम्मीदवार के रूप में पेश किया।
उनकी चुनावी मुहिम का सबसे चर्चित वादा 10 मेगा जेल बनाने का है। डी ला एस्प्रिएला का कहना है कि कोलंबिया में बढ़ते अपराध, ड्रग तस्करी और सशस्त्र गिरोहों को खत्म करने के लिए कठोर कदम उठाने होंगे। उन्होंने साफ कहा है कि यदि वे राष्ट्रपति बनते हैं तो अपराधियों के खिलाफ बेहद सख्त अभियान चलाया जाएगा और बड़े स्तर पर हाई-सिक्योरिटी जेलों का निर्माण किया जाएगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनकी रणनीति काफी हद तक अल सल्वाडोर के राष्ट्रपति नायब बुकेले की नीतियों से प्रेरित दिखाई देती है। बुकेले ने अपराध और गैंग हिंसा के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा हासिल की थी। डी ला एस्प्रिएला भले ही सीधे तौर पर खुद की तुलना बुकेले से नहीं करते, लेकिन उनकी चुनावी भाषा और कानून-व्यवस्था पर जोर कई मामलों में समान माना जा रहा है।
डी ला एस्प्रिएला की पहचान केवल एक राजनेता के रूप में नहीं है। वे एक सफल वकील और कारोबारी भी रहे हैं। उन्होंने पहले कभी कोई सार्वजनिक पद नहीं संभाला, लेकिन खुद को पारंपरिक राजनीति से अलग एक बाहरी उम्मीदवार के रूप में पेश किया है। यही वजह है कि बड़ी संख्या में ऐसे मतदाता भी उनके साथ जुड़े, जो पारंपरिक राजनीतिक दलों से निराश बताए जाते हैं।
उनके समर्थक उन्हें कोलंबिया के लिए मजबूत नेतृत्व का विकल्प मान रहे हैं। चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने बार-बार कहा कि देश में बढ़ती हिंसा, ड्रग कार्टेल और अवैध सशस्त्र समूहों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की जरूरत है। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा नीतियों के कारण अपराधी नेटवर्क और अधिक मजबूत हुए हैं।
डी ला एस्प्रिएला को डोनाल्ड ट्रंप का समर्थक माना जाता है और उन्होंने कई बार सार्वजनिक रूप से ट्रंप की प्रशंसा भी की है। उन्होंने अमेरिका के साथ मजबूत संबंधों की वकालत की है और कहा है कि कोलंबिया को सुरक्षा और आर्थिक मामलों में अमेरिका के साथ अधिक सहयोग बढ़ाना चाहिए।
उनकी बढ़ती लोकप्रियता को लैटिन अमेरिका में दक्षिणपंथी राजनीति के उभार से भी जोड़कर देखा जा रहा है। हाल के वर्षों में कई देशों में मतदाता कानून-व्यवस्था, सुरक्षा और आर्थिक मुद्दों पर सख्त रुख अपनाने वाले नेताओं की ओर आकर्षित हुए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कोलंबिया में भी यही रुझान दिखाई दे रहा है।
दूसरी ओर उनके विरोधी उन्हें अत्यधिक कठोर और विवादास्पद नेता बताते हैं। वामपंथी उम्मीदवार इवान सेपेदा और उनके समर्थकों का कहना है कि देश की समस्याओं का समाधान केवल सख्ती से नहीं, बल्कि सामाजिक सुधारों और शांति प्रक्रिया के जरिए भी निकाला जाना चाहिए।
इवान सेपेदा वर्तमान राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो के करीबी सहयोगी माने जाते हैं और उन्होंने शांति वार्ता तथा सामाजिक कल्याण योजनाओं को आगे बढ़ाने का वादा किया है। हालांकि चुनाव परिणामों ने संकेत दिया है कि बड़ी संख्या में मतदाता सुरक्षा और अपराध नियंत्रण को प्राथमिक मुद्दा मान रहे हैं।
चुनाव परिणामों के बाद कोलंबिया के बाजारों में भी सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिली। कुछ रिपोर्टों के अनुसार निवेशकों ने डी ला एस्प्रिएला की व्यवसाय समर्थक नीतियों और नियमों में ढील के वादों को सकारात्मक संकेत के रूप में देखा है।
अब पूरे देश की नजर रनऑफ चुनाव पर टिकी हुई है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि दूसरे दौर में हारने वाले अन्य उम्मीदवारों के समर्थक निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। यदि डी ला एस्प्रिएला अपनी बढ़त बनाए रखने में सफल रहते हैं, तो कोलंबिया की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
फिलहाल इतना तय है कि ‘द टाइगर’ के नाम से मशहूर एबेलार्डो डी ला एस्प्रिएला ने कोलंबिया की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। अपराध के खिलाफ सख्त कार्रवाई, 10 मेगा जेलों का वादा और ट्रंप समर्थक छवि ने उन्हें चुनाव का सबसे चर्चित चेहरा बना दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या वे दूसरे दौर में भी अपनी बढ़त कायम रख पाते हैं या कोलंबिया की जनता कोई दूसरा रास्ता चुनती है।