
हरिद्वार। सावन के दौरान लाखों शिवभक्तों की आस्था का केंद्र बना हरिद्वार अब कांवड़ मेले के बाद सफाई की बड़ी चुनौती से जूझ रहा है। दो सप्ताह तक चले कांवड़ मेले के बाद शहर में करीब 7,000 मीट्रिक टन कचरा जमा होने का अनुमान है। कांवड़ियों के लौटने के बाद हरिद्वार के घाटों, सड़कों, पार्किंग क्षेत्रों और कांवड़ मार्गों पर जगह-जगह कूड़े के ढेर दिखाई दे रहे हैं। प्रशासन ने अब बड़े स्तर पर सफाई अभियान शुरू किया है, जिसमें 1,000 से ज्यादा सफाईकर्मियों और 100 आउटसोर्स कर्मचारियों को लगाया गया है।
कांवड़ मेले के बाद सफाई की बड़ी चुनौती
हरिद्वार में कांवड़ यात्रा के दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगाजल लेने पहुंचे। मेले के दौरान शहर की आबादी और रोजाना की गतिविधियों में अचानक भारी बढ़ोतरी हुई। इसका सीधा असर कचरा प्रबंधन व्यवस्था पर पड़ा।
प्रशासन के अनुसार करीब 7 हजार मीट्रिक टन कचरा जमा हुआ है। इसमें प्लास्टिक, पॉलीथिन, कपड़े, डिस्पोजेबल सामान और छोड़ी गई कांवड़ जैसी चीजें शामिल हैं। हर की पैड़ी और दूसरे घाटों के अलावा बाजारों, गलियों, पार्किंग क्षेत्रों और कांवड़ मार्गों पर भी कचरा फैला हुआ है।
1,000 से ज्यादा कर्मचारी सफाई में जुटे
हरिद्वार जिला प्रशासन ने 12 से 18 अगस्त तक मेगा क्लीननेस ड्राइव चलाने का फैसला किया है। इस अभियान के तहत नगर निकायों और स्थानीय प्रशासन की टीमें अलग-अलग इलाकों में सफाई कर रही हैं।
अधिकारियों के मुताबिक, 1,000 से ज्यादा सैनिटेशन कर्मचारी और करीब 100 आउटसोर्स कर्मचारी सफाई अभियान में लगाए गए हैं। इसके अलावा कचरे को इकट्ठा करने, उसे निर्धारित स्थानों तक पहुंचाने और निस्तारण के लिए करीब 80 वाहन भी लगाए गए हैं।
सफाईकर्मियों की टीमें हर की पैड़ी, गंगा घाटों, कांवड़ मेला क्षेत्र, बाजारों और प्रमुख सड़कों पर काम कर रही हैं।
ड्रोन से हो रही कचरे की निगरानी
इस बार सफाई व्यवस्था की निगरानी के लिए तकनीक का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। प्रशासन ड्रोन के जरिए कचरे के ढेर और सफाई अभियान की निगरानी कर रहा है।
ड्रोन से ऊपर से पूरे इलाके की तस्वीर मिलने के कारण ऐसे स्थानों की पहचान करना आसान हो जाता है, जहां जमीन से निरीक्षण के दौरान कचरा नजर नहीं आ पाता। इसके आधार पर सफाई टीमों को संबंधित स्थानों पर भेजा जा रहा है।
अधिकारियों की कोशिश है कि अभियान को तय समय सीमा के भीतर पूरा कर शहर को कांवड़ मेले से पहले की स्थिति में वापस लाया जाए।
गंगा घाटों पर सबसे ज्यादा दबाव
कांवड़ मेले के बाद सबसे ज्यादा चिंता गंगा के घाटों और नदी के आसपास जमा कचरे को लेकर है। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के कारण इन क्षेत्रों में प्लास्टिक, पॉलीथिन, कपड़े और दूसरे तरह का कचरा जमा हुआ है।
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह कचरा समय पर नहीं हटाया गया और बारिश के पानी के साथ नदी में पहुंच गया तो गंगा के प्रदूषण का स्तर बढ़ सकता है। प्लास्टिक और पॉलीथिन के नदी में जाने से माइक्रोप्लास्टिक से जुड़ी चिंताएं भी बढ़ती हैं।
कपड़े और कांवड़ भी छोड़ गए श्रद्धालु
कचरे में केवल प्लास्टिक और खाने-पीने का सामान ही नहीं है। अधिकारियों के मुताबिक, मेले के बाद बड़ी मात्रा में कपड़े और कांवड़ भी जगह-जगह मिले हैं।
फेंके गए कपड़ों को अलग करके रीसाइक्लिंग के लिए भेजने की योजना है। इससे कचरे के बोझ को कुछ हद तक कम किया जा सकता है और उपयोगी सामग्री को दोबारा इस्तेमाल में लाया जा सकेगा।
अखाड़ा परिषद ने भी दिया सहयोग का भरोसा
सफाई अभियान में स्थानीय प्रशासन के साथ संत समाज और अखाड़ों को भी जोड़ने की कोशिश की जा रही है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने अभियान में सहयोग का भरोसा दिया है।
अखाड़ों के साधु-संत और पदाधिकारी भी सफाई अभियान में भाग लेने की बात कह चुके हैं। प्रशासन का मानना है कि इतने बड़े धार्मिक आयोजन के बाद केवल सरकारी कर्मचारियों के भरोसे सफाई करना पर्याप्त नहीं होगा। स्थानीय लोगों, धार्मिक संगठनों, व्यापारियों, स्वयंसेवकों और सामाजिक संस्थाओं की भागीदारी भी जरूरी है।
पर्यावरणविदों ने जताई चिंता
पर्यावरण विशेषज्ञों ने कचरे के तेजी से निस्तारण की जरूरत पर जोर दिया है। उनका कहना है कि हरिद्वार में कांवड़ मेले के दौरान बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी का असर स्वाभाविक रूप से शहर और गंगा के पर्यावरण पर पड़ता है।
अगर प्लास्टिक, पॉलीथिन, सीवेज और दूसरे तरह का कचरा नदी में पहुंचता है तो इससे पानी की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। इसलिए मेले के दौरान ही कचरा प्रबंधन को और मजबूत करने की जरूरत बताई जा रही है।
हर साल बढ़ती भीड़, बढ़ती चुनौती
कांवड़ यात्रा में पिछले कुछ वर्षों में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ी है। ऐसे में धार्मिक आयोजन के साथ-साथ कचरा प्रबंधन, स्वच्छता, यातायात और पर्यावरण संरक्षण प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ मेले के बाद सफाई अभियान चलाने के बजाय यात्रा के दौरान ही कचरे को अलग-अलग श्रेणियों में जमा करने, प्लास्टिक के इस्तेमाल को सीमित करने और पर्याप्त डस्टबिन उपलब्ध कराने जैसी व्यवस्था मजबूत करनी होगी।
श्रद्धालुओं से भी सहयोग की अपील
हरिद्वार में सफाई अभियान के बीच प्रशासन और संत समाज ने श्रद्धालुओं से भी अपील की है कि वे गंगा घाटों पर कचरा न फैलाएं। गंगा को धार्मिक रूप से मां का दर्जा देने वाले श्रद्धालुओं से नदी को साफ रखने की जिम्मेदारी निभाने का आग्रह किया जा रहा है।
हर की पैड़ी का प्रबंधन करने वाली गंगा सभा भी सार्वजनिक घोषणाओं के जरिए श्रद्धालुओं को घाटों पर कचरा नहीं छोड़ने के लिए जागरूक करती रही है। संस्था के स्वयंसेवक घाटों की सफाई में भी सहयोग कर रहे हैं।
अब लक्ष्य जल्द सामान्य स्थिति बहाल करना
प्रशासन का लक्ष्य मेगा क्लीननेस ड्राइव के जरिए हरिद्वार को जल्द से जल्द सामान्य स्थिति में लाना है। इसके लिए सफाई, कचरा संग्रहण और परिवहन का काम लगातार चल रहा है।
हालांकि, 7,000 मीट्रिक टन कचरे को हटाना आसान काम नहीं है। इसके लिए बड़ी संख्या में कर्मचारियों के साथ पर्याप्त वाहन, कचरा निस्तारण की क्षमता और लगातार निगरानी की जरूरत होगी।
कांवड़ यात्रा ने जहां हरिद्वार को आस्था और श्रद्धा से भर दिया, वहीं मेले के बाद छोड़ा गया हजारों टन कचरा शहर के सामने एक बड़ी पर्यावरणीय और प्रशासनिक चुनौती बन गया है। अब 1,000 से ज्यादा कर्मचारी और प्रशासनिक टीमें सफाई में जुटी हैं। असली चुनौती सिर्फ इस बार का कचरा हटाना नहीं, बल्कि भविष्य में इतने बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को आयोजन की योजना का स्थायी हिस्सा बनाना है।