2025 में लगी नौकरी, 2026 में सस्पेंड! गाजीपुर में तीन सिपाहियों पर एक्शन, ड्यूटी छोड़ हाईवे पर कर रहे थे वसूली

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गाजीपुर। उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में पुलिस विभाग ने तीन नए सिपाहियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। आरोप है कि 2025 बैच में भर्ती हुए ये तीनों पुलिसकर्मी अपनी निर्धारित ड्यूटी पर रहने के बजाय पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के मरदह टोल प्लाजा के पास पहुंचकर वाहनों की चेकिंग के नाम पर कथित तौर पर अवैध वसूली कर रहे थे। मामले की शिकायत मिलने और सोशल मीडिया पर इससे जुड़ी एक रील वायरल होने के बाद पुलिस अधिकारियों ने जांच कराई। प्राथमिक जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद तीनों सिपाहियों को निलंबित कर दिया गया।

तीनों सिपाही 2025 बैच के हैं

जिन पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई हुई है, उनमें अजय सिंह, युवराज सिंह और दीपू कुशवाहा शामिल हैं। तीनों की भर्ती पुलिस विभाग में वर्ष 2025 में हुई थी। इसके बाद उनकी तैनाती गाजीपुर के मरदह थाना क्षेत्र में की गई थी।

नौकरी शुरू किए अभी करीब एक साल ही हुआ था कि तीनों सिपाहियों पर गंभीर अनुशासनात्मक कार्रवाई हो गई। पुलिस विभाग ने निलंबन के साथ ही उनके खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू कर दी है।

ड्यूटी छोड़कर हाईवे पर पहुंचने का आरोप

मामले के अनुसार, तीनों सिपाहियों को अपनी निर्धारित ड्यूटी करनी थी, लेकिन आरोप है कि वे ड्यूटी छोड़कर पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के मरदह टोल प्लाजा के आसपास पहुंच जाते थे।

यहां वे कथित तौर पर वाहनों को रोककर उनकी चेकिंग करते थे। आरोप है कि चेकिंग के नाम पर वाहन चालकों से पैसे लिए जाते थे। पुलिस विभाग के अनुसार, इन सिपाहियों को टोल प्लाजा पर इस तरह की चेकिंग या वसूली के लिए कोई अधिकृत जिम्मेदारी नहीं दी गई थी।

सोशल मीडिया रील से खुला मामला

इस मामले में सोशल मीडिया पर वायरल हुई एक रील अहम कड़ी बनी। कथित तौर पर सिपाहियों की हाईवे पर मौजूदगी और वाहनों की चेकिंग से जुड़ा वीडियो सामने आने के बाद मामला अधिकारियों तक पहुंचा।

इसके अलावा पुलिस को शिकायत भी मिली थी। इसके बाद वरिष्ठ अधिकारियों ने मामले की जांच के निर्देश दिए। प्राथमिक जांच में आरोपों की पुष्टि होने के बाद तीनों सिपाहियों के खिलाफ कार्रवाई की गई।

SP ने तीनों को किया निलंबित

गाजीपुर के पुलिस अधीक्षक डॉ. ईरज राजा ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तीनों सिपाहियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। निलंबन के बाद उन्हें पुलिस लाइन से संबद्ध कर दिया गया है।

साथ ही तीनों के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि कथित वसूली कितने समय से चल रही थी और क्या इसमें किसी अन्य पुलिसकर्मी या व्यक्ति की भी भूमिका थी।

वसूली कितने समय से चल रही थी?

मामले की विभागीय जांच में यह भी पता लगाया जाएगा कि तीनों सिपाही कितने समय से कथित तौर पर हाईवे पर वाहनों की चेकिंग कर रहे थे। पुलिस यह भी जांच सकती है कि उन्होंने कितने वाहनों को रोका और क्या हर बार उनसे पैसे लिए गए।

इसके अलावा यह भी देखा जाएगा कि तीनों सिपाही अपनी निर्धारित ड्यूटी से कितनी बार अनुपस्थित रहे और क्या उन्होंने किसी अधिकारी से हाईवे पर जाने की अनुमति ली थी।

अन्य पुलिसकर्मियों की भूमिका भी जांच के दायरे में

फिलहाल कार्रवाई तीन सिपाहियों के खिलाफ हुई है। हालांकि, विभागीय जांच के दौरान यदि किसी अन्य पुलिसकर्मी या बाहरी व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।

पुलिस प्रशासन यह भी जांच सकता है कि संबंधित थाना स्तर पर इन सिपाहियों की ड्यूटी और गतिविधियों की निगरानी किस तरह की जा रही थी।

नौकरी के एक साल के भीतर कार्रवाई

इस मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि तीनों सिपाही 2025 बैच के नए भर्ती पुलिसकर्मी हैं। नौकरी शुरू करने के करीब एक साल के भीतर ही उन पर निलंबन की कार्रवाई हो गई।

पुलिस विभाग में नई नियुक्ति के बाद कर्मचारियों से अनुशासन, ईमानदारी और निर्धारित ड्यूटी के नियमों का पालन करने की अपेक्षा की जाती है। ऐसे में ड्यूटी छोड़कर हाईवे पर कथित वसूली के आरोपों को गंभीर माना गया है।

पुलिस विभाग ने दिया सख्त संदेश

इस कार्रवाई के जरिए पुलिस प्रशासन ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि किसी भी पुलिसकर्मी को अपनी वर्दी और पद का इस्तेमाल निजी लाभ के लिए करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

ड्यूटी से हटकर बिना अनुमति वाहनों की चेकिंग करना और कथित तौर पर उनसे पैसे लेना गंभीर अनुशासनहीनता के दायरे में आता है। इसी वजह से मामले में तत्काल निलंबन की कार्रवाई की गई।

अब विभागीय जांच में क्या होगा?

निलंबन के बाद तीनों सिपाहियों के खिलाफ विभागीय जांच जारी रहेगी। जांच के दौरान शिकायत, वायरल वीडियो और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की समीक्षा की जाएगी।

जांच में आरोपों की पुष्टि होने पर तीनों के खिलाफ आगे भी विभागीय कार्रवाई की जा सकती है। वहीं, जांच के अंतिम निष्कर्ष के आधार पर ही यह तय होगा कि उन्हें किस तरह की सजा दी जाएगी।

वायरल वीडियो बना अहम सुराग

आज के दौर में सोशल मीडिया पर सामने आने वाले वीडियो कई मामलों में जांच की शुरुआती कड़ी बन जाते हैं। गाजीपुर के इस मामले में भी वायरल रील के बाद अधिकारियों का ध्यान कथित वसूली की ओर गया।

हालांकि, किसी वायरल वीडियो को अंतिम निष्कर्ष का आधार नहीं माना जा सकता। पुलिस ने शिकायत और उपलब्ध तथ्यों की जांच के बाद ही तीनों सिपाहियों को निलंबित किया है।

कुल मिलाकर, गाजीपुर में 2025 बैच के तीन नए सिपाहियों पर पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के मरदह टोल प्लाजा के पास कथित अवैध वसूली और ड्यूटी में लापरवाही के आरोप लगे हैं। शिकायत और सोशल मीडिया पर वायरल रील के बाद मामले की जांच हुई, जिसके आधार पर तीनों को निलंबित कर पुलिस लाइन से संबद्ध कर दिया गया। अब विभागीय जांच से यह स्पष्ट होगा कि कथित वसूली कितने समय से चल रही थी और इसमें केवल ये तीन सिपाही शामिल थे या किसी अन्य व्यक्ति की भी भूमिका थी।

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