पीरियड्स बार-बार लेट हो रहे हैं? चेहरे पर मुंहासे और अनचाहे बाल भी हैं तो इस बीमारी का हो सकता है संकेत

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हर महीने पीरियड्स की तारीख का आगे खिसकना कई महिलाओं को सामान्य बात लग सकती है। कभी-कभी तनाव, वजन में बदलाव, ज्यादा एक्सरसाइज, हार्मोनल गर्भनिरोधक या गर्भावस्था जैसी वजहों से पीरियड्स देर से आ सकते हैं। इसलिए केवल एक बार पीरियड्स लेट होने का मतलब किसी बीमारी से होना नहीं है। लेकिन अगर यह समस्या बार-बार हो रही है और इसके साथ चेहरे पर मुंहासे, ठुड्डी या गालों पर अनचाहे बाल, वजन बढ़ना या गर्भधारण में परेशानी जैसी दिक्कतें भी दिखाई दे रही हैं, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

ऐसे लक्षण हार्मोन से जुड़ी एक स्थिति की ओर इशारा कर सकते हैं, जिसे पहले पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम यानी PCOS कहा जाता था। अब इसे पॉलीएंडोक्राइन मेटाबॉलिक ओवेरियन सिंड्रोम यानी PMOS नाम से भी जाना जा रहा है। यह केवल पीरियड्स से जुड़ी समस्या नहीं है, बल्कि हार्मोनल और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य से भी संबंधित स्थिति है।

पीरियड्स लेट होना कब चिंता की बात हो सकती है?

हर महिला का मासिक चक्र बिल्कुल एक जैसा नहीं होता। कई बार कुछ दिन आगे-पीछे होना सामान्य हो सकता है। लेकिन जब पीरियड्स का पैटर्न लगातार बदलने लगे या लंबे अंतराल के बाद आएं, तब इसके पीछे की वजह समझना जरूरी हो जाता है।

आम तौर पर अनियमित पीरियड्स में दो चक्रों के बीच अंतर बहुत कम या बहुत ज्यादा हो सकता है। NHS के अनुसार, 21 दिनों से कम या 35 दिनों से अधिक का अंतर अनियमित चक्र माना जा सकता है। हालांकि किसी व्यक्ति का सामान्य पैटर्न, उम्र और परिस्थितियां भी महत्वपूर्ण होती हैं।

पीरियड्स में देरी के कई कारण हो सकते हैं। गर्भावस्था उनमें से एक महत्वपूर्ण कारण है। इसके अलावा तनाव, अचानक वजन कम या ज्यादा होना, अत्यधिक व्यायाम, हार्मोनल गर्भनिरोधक, स्तनपान, मेनोपॉज के आसपास का समय और थायरॉयड जैसी समस्याएं भी मासिक चक्र को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए केवल पीरियड्स देर से आने को देखकर खुद से किसी बीमारी का निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए।

लेकिन अगर पीरियड्स बार-बार अनियमित हो रहे हैं और साथ में हार्मोन से जुड़े दूसरे संकेत भी मौजूद हैं, तो डॉक्टर से जांच कराना बेहतर होता है।

PMOS क्या है और शरीर पर इसका असर कैसे पड़ता है?

PMOS एक हार्मोनल स्थिति है, जिसका असर पीरियड्स, ओव्यूलेशन, बालों की ग्रोथ, त्वचा, वजन और प्रजनन क्षमता पर पड़ सकता है। इस स्थिति में शरीर के हार्मोनल संतुलन में बदलाव हो सकता है और कई महिलाओं में एंड्रोजन हार्मोन से जुड़े लक्षण दिखाई देते हैं।

ओव्यूलेशन यानी अंडे का नियमित रूप से रिलीज होना मासिक चक्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यदि ओव्यूलेशन नियमित रूप से नहीं हो रहा है, तो पीरियड्स भी समय पर नहीं आ सकते। कुछ महिलाओं में पीरियड्स के बीच लंबा अंतर हो सकता है, जबकि कुछ में लंबे समय तक पीरियड्स न आने की स्थिति भी बन सकती है।

इसी वजह से बार-बार पीरियड्स लेट होने को सिर्फ कैलेंडर की तारीखों का बदलाव समझना सही नहीं है। यह शरीर में चल रहे हार्मोनल बदलाव का एक संकेत हो सकता है।

चेहरे पर मुंहासे और अनचाहे बाल क्यों बढ़ सकते हैं?

PMOS में एंड्रोजन हार्मोन के स्तर या उसके प्रभाव में बदलाव हो सकता है। इसके कारण कुछ महिलाओं में चेहरे या शरीर के उन हिस्सों पर ज्यादा बाल आने लगते हैं, जहां आम तौर पर बाल कम होते हैं। ठुड्डी, ऊपरी होंठ, गाल या जबड़े के आसपास अनचाहे बाल दिखाई देना इसी तरह का एक लक्षण हो सकता है।

इसके साथ ही त्वचा अधिक ऑयली हो सकती है और मुंहासों की समस्या बढ़ सकती है। कई बार महिलाओं को लगता है कि यह केवल स्किन केयर या उम्र से जुड़ी समस्या है, लेकिन अगर इसके साथ पीरियड्स भी अनियमित हैं तो हार्मोनल कारणों की जांच करना उपयोगी हो सकता है।

हालांकि यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि मुंहासे या चेहरे पर बाल आना अपने आप में PMOS का प्रमाण नहीं है। इन लक्षणों के पीछे कई अन्य कारण भी हो सकते हैं। डॉक्टर पूरी स्थिति और अन्य संभावित कारणों को देखकर ही निष्कर्ष निकालते हैं।

सिर्फ पीरियड्स लेट होने से PMOS नहीं माना जाता

यह एक महत्वपूर्ण बात है। यदि किसी महिला का एक या दो बार पीरियड्स देर से आया है तो इसका मतलब यह नहीं कि उसे PMOS है।

मासिक चक्र पर तनाव, नींद, वजन में बदलाव, खान-पान, अत्यधिक एक्सरसाइज, गर्भावस्था और कई अन्य स्थितियों का असर पड़ सकता है। इसलिए केवल कैलेंडर देखकर बीमारी का अनुमान लगाना सही तरीका नहीं है।

PMOS की पहचान के लिए डॉक्टर आम तौर पर पीरियड्स के पैटर्न, हार्मोन से जुड़े लक्षण और जरूरत पड़ने पर जांचों को देखते हैं। कुछ चिकित्सा मानकों में अनियमित ओव्यूलेशन, एंड्रोजन हार्मोन के बढ़े हुए स्तर या उसके लक्षण और ओवरी में पॉलीसिस्टिक पैटर्न जैसे संकेतों को ध्यान में रखा जाता है। हर मरीज में सभी लक्षण मौजूद होना जरूरी नहीं होता।

यानी अगर किसी महिला को पीरियड्स की समस्या के साथ मुंहासे या अनचाहे बाल भी बढ़ रहे हैं, तो उसे डॉक्टर से सलाह लेकर सही कारण पता करना चाहिए।

PMOS और वजन का क्या संबंध है?

PMOS से जुड़ी महिलाओं में वजन बढ़ना या वजन कम करने में परेशानी भी देखी जा सकती है। लेकिन यह मान लेना गलत होगा कि केवल ज्यादा वजन वाली महिलाओं को ही यह समस्या होती है। अलग-अलग शरीर और वजन वाली महिलाओं में इसके लक्षण अलग तरीके से दिखाई दे सकते हैं।

हार्मोनल और मेटाबॉलिक बदलावों के कारण कुछ महिलाओं में वजन से जुड़ी समस्या हो सकती है। वहीं कुछ महिलाओं में वजन सामान्य होने के बावजूद पीरियड्स अनियमित, मुंहासे या अनचाहे बाल जैसी परेशानियां हो सकती हैं।

इसलिए केवल वजन के आधार पर PMOS की पहचान करना सही नहीं है। डॉक्टर जरूरत के अनुसार हार्मोन, मेटाबॉलिक स्वास्थ्य और दूसरे जोखिमों का मूल्यांकन कर सकते हैं।

क्या इससे गर्भधारण में परेशानी हो सकती है?

PMOS का एक महत्वपूर्ण प्रभाव ओव्यूलेशन पर पड़ सकता है। अगर अंडा नियमित रूप से रिलीज नहीं होता, तो गर्भधारण में कठिनाई हो सकती है। इसका मतलब यह नहीं है कि PMOS वाली महिला गर्भवती नहीं हो सकती। उचित चिकित्सकीय सलाह और इलाज के साथ कई महिलाओं को गर्भधारण में मदद मिल सकती है।

अनियमित पीरियड्स की वजह से ओव्यूलेशन का समय भी अनुमान लगाना मुश्किल हो सकता है। यही कारण है कि यदि कोई महिला गर्भधारण की कोशिश कर रही है और उसके पीरियड्स लगातार अनियमित हैं, तो उसे डॉक्टर से सलाह लेने में देरी नहीं करनी चाहिए।

फर्टिलिटी से जुड़ा इलाज हर महिला के लिए एक जैसा नहीं होता। उपचार का चुनाव इस बात पर निर्भर करता है कि समस्या किस वजह से हो रही है और महिला की व्यक्तिगत स्थिति क्या है।

PMOS की जांच कैसे होती है?

यदि डॉक्टर को PMOS का संदेह होता है, तो वह महिला के पीरियड्स के इतिहास और दूसरे लक्षणों के बारे में जानकारी ले सकते हैं। इसके बाद जरूरत के अनुसार हार्मोन संबंधी ब्लड टेस्ट और अन्य जांच कराई जा सकती हैं।

कुछ मामलों में ओवरी की स्थिति देखने के लिए अल्ट्रासाउंड भी किया जा सकता है। लेकिन केवल अल्ट्रासाउंड में पॉलीसिस्टिक ओवरी दिखाई देना ही हर बार PMOS का अंतिम प्रमाण नहीं होता। इसी तरह, हर महिला को निदान के लिए अल्ट्रासाउंड की आवश्यकता भी नहीं होती।

डॉक्टर अन्य कारणों को भी ध्यान में रखते हैं। उदाहरण के लिए, थायरॉयड से जुड़ी समस्या भी पीरियड्स के पैटर्न को प्रभावित कर सकती है। इसलिए बिना जांच के किसी एक बीमारी को जिम्मेदार मानना उचित नहीं है।

इसका इलाज कैसे किया जाता है?

PMOS के लिए सभी महिलाओं का एक जैसा इलाज नहीं होता। उपचार मुख्य रूप से लक्षणों और महिला की जरूरत के अनुसार तय किया जाता है।

यदि मुख्य समस्या अनियमित पीरियड्स है तो डॉक्टर ऐसी दवाओं पर विचार कर सकते हैं जो मासिक चक्र को नियंत्रित करने में मदद करें। कुछ मामलों में हार्मोनल उपचार उपयोगी हो सकते हैं। यदि मुंहासे या अनचाहे बाल प्रमुख समस्या हैं, तो उनके लिए अलग उपचार दिए जा सकते हैं।

अगर महिला गर्भधारण की कोशिश कर रही है और ओव्यूलेशन से संबंधित समस्या है, तो फर्टिलिटी उपचार पर ध्यान दिया जाता है। कुछ स्थितियों में ऐसी दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है जो ओव्यूलेशन को बढ़ावा देने में मदद कर सकती हैं। इसका निर्णय डॉक्टर जांच के बाद करते हैं।

लाइफस्टाइल में बदलाव भी हो सकते हैं मददगार

PMOS जैसी हार्मोनल और मेटाबॉलिक स्थिति में स्वस्थ जीवनशैली भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद और वजन को स्वस्थ सीमा में रखने पर ध्यान देना उपयोगी हो सकता है।

अगर किसी महिला का वजन ज्यादा है, तो डॉक्टर उसके लिए सुरक्षित और धीरे-धीरे वजन कम करने की रणनीति सुझा सकते हैं। लेकिन किसी भी तरह की क्रैश डाइट या अत्यधिक एक्सरसाइज को समाधान नहीं माना जाना चाहिए।

लाइफस्टाइल में बदलाव का उद्देश्य केवल वजन कम करना नहीं है। शरीर के मेटाबॉलिक स्वास्थ्य, ऊर्जा और हार्मोनल संतुलन को बेहतर बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है।

कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?

अगर पीरियड्स लगातार अनियमित हो रहे हैं तो डॉक्टर से सलाह लेना उचित है। खासतौर पर तब जब इसके साथ वजन में बदलाव, अत्यधिक थकान, चेहरे पर अनचाहे बाल, ऑयली स्किन या मुंहासे जैसे लक्षण भी दिखाई दे रहे हों।

यदि लगातार तीन बार पीरियड्स मिस हो गए हैं, तो चिकित्सकीय सलाह लेने की जरूरत है। इसी तरह, अगर लंबे समय से पीरियड्स का पैटर्न बदल गया है या गर्भधारण में परेशानी हो रही है, तो जांच कराना बेहतर है।

महिलाओं को अपने पीरियड्स का रिकॉर्ड भी रखना चाहिए। कैलेंडर या पीरियड-ट्रैकिंग ऐप में पीरियड्स की तारीख, अवधि और असामान्य लक्षण दर्ज करने से डॉक्टर को समस्या समझने में मदद मिल सकती है।

हर लेट पीरियड का मतलब PCOS या PMOS नहीं

पीरियड्स में देरी को लेकर सबसे जरूरी बात यह है कि घबराने की जरूरत नहीं है। एक बार पीरियड्स देर होने का अर्थ यह नहीं कि कोई गंभीर बीमारी मौजूद है। तनाव, यात्रा, नींद में बदलाव, वजन में अचानक परिवर्तन और कई अन्य सामान्य कारणों से भी मासिक चक्र प्रभावित हो सकता है।

लेकिन अगर देरी लगातार हो रही है और साथ में शरीर में दूसरे बदलाव भी नजर आ रहे हैं, तो इसे अनदेखा करना भी ठीक नहीं है। खासकर पीरियड्स की अनियमितता के साथ चेहरे पर मुंहासे, ठुड्डी या चेहरे पर ज्यादा बाल, वजन से जुड़ी परेशानी या गर्भधारण में कठिनाई हो तो हार्मोनल जांच की जरूरत पड़ सकती है।

सबसे जरूरी बात यह है कि खुद से कोई दवा शुरू न करें और इंटरनेट पर मौजूद लक्षणों से खुद बीमारी तय न करें। PMOS और दूसरी हार्मोनल समस्याओं के लक्षण एक-दूसरे से मिल सकते हैं। सही निदान के लिए स्त्री रोग विशेषज्ञ या संबंधित डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर रहता है।

पीरियड्स शरीर के स्वास्थ्य का एक महत्वपूर्ण संकेत हैं। इसलिए तारीखों में बार-बार होने वाले बदलाव को केवल कैलेंडर की समस्या समझने के बजाय शरीर के बाकी संकेतों के साथ देखना चाहिए। समय पर जांच और सही उपचार से लक्षणों को नियंत्रित करने, मेटाबॉलिक स्वास्थ्य को बेहतर रखने और जरूरत पड़ने पर फर्टिलिटी संबंधी समस्याओं में मदद लेने का रास्ता खुल सकता है।

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