मुंबई में SRA फ्लैट दिलाने के नाम पर ₹5.57 करोड़ की कथित ठगी, उद्धव गुट के विधायक और कांग्रेस सांसद के पीए पर FIR

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मुंबई। मुंबई में स्लम रिहैबिलिटेशन अथॉरिटी (SRA) के तहत प्रोजेक्ट अफेक्टेड पर्सन्स (PAP) फ्लैट दिलाने के नाम पर करोड़ों रुपये की कथित ठगी का मामला सामने आया है। इस मामले में मुंबई पुलिस ने शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट के एक विधायक और कांग्रेस के एक सांसद के निजी सहायक (PA) समेत कई लोगों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि पीड़ितों से सरकारी योजना के तहत फ्लैट दिलाने का भरोसा देकर करीब 5.57 करोड़ रुपये लिए गए, लेकिन न तो फ्लैट मिले और न ही रकम वापस की गई।

पुलिस के अनुसार, शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि आरोपियों ने खुद को प्रभावशाली राजनीतिक संपर्कों वाला बताते हुए भरोसा दिलाया कि वे SRA के तहत पात्र लोगों को PAP फ्लैट आवंटित करा सकते हैं। इसी भरोसे में अलग-अलग चरणों में करोड़ों रुपये का भुगतान किया गया। लेकिन लंबे समय तक इंतजार के बाद भी फ्लैट आवंटित नहीं हुए। जब पीड़ितों ने अपनी रकम वापस मांगी, तो उन्हें कथित रूप से टालमटोल किया गया और बाद में संपर्क भी सीमित कर दिया गया।

मामला सामने आने के बाद पीड़ितों ने पुलिस से संपर्क किया। प्रारंभिक जांच के आधार पर मुंबई पुलिस ने संबंधित धाराओं के तहत धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और आपराधिक साजिश सहित अन्य प्रासंगिक प्रावधानों में FIR दर्ज की है। पुलिस अब धन के लेनदेन, बैंक खातों, दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कथित धोखाधड़ी किस प्रकार की गई और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका थी।

जांच अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल यह शुरुआती चरण की जांच है। आरोपियों से पूछताछ की जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित दस्तावेज, कॉल रिकॉर्ड तथा वित्तीय लेनदेन का फोरेंसिक विश्लेषण भी कराया जाएगा। यदि जांच में पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं, तो आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस मामले में अभी तक किसी अदालत ने आरोपों की पुष्टि नहीं की है और सभी आरोप जांच के अधीन हैं।

SRA और PAP फ्लैट योजनाएं मुंबई में झुग्गी पुनर्विकास और परियोजनाओं से प्रभावित लोगों के पुनर्वास के लिए चलाई जाती हैं। इन योजनाओं में पात्रता, आवंटन और स्वीकृति की स्पष्ट सरकारी प्रक्रिया होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति सरकारी आवंटन के नाम पर निजी तौर पर धन की मांग करता है, तो लाभार्थियों को उसकी वैधता की जांच अवश्य करनी चाहिए और केवल अधिकृत सरकारी प्रक्रिया पर ही भरोसा करना चाहिए।

इस मामले ने एक बार फिर पुनर्वास योजनाओं के नाम पर होने वाली कथित धोखाधड़ी को लेकर चिंता बढ़ा दी है। मुंबई पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे सरकारी योजनाओं में किसी भी प्रकार का भुगतान करने से पहले संबंधित विभाग से जानकारी की पुष्टि करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें। फिलहाल जांच जारी है और अधिकारियों का कहना है कि मामले से जुड़े सभी तथ्यों की गहनता से पड़ताल की जाएगी।

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