सीने की हड्डी काटे बिना बदला गया हार्ट वॉल्व, सफदरजंग अस्पताल के डॉक्टरों ने रचा नया इतिहास

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नई दिल्ली। देश की चिकित्सा विज्ञान की दुनिया में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज करते हुए दिल्ली के वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज (VMMC) एवं सफदरजंग अस्पताल के डॉक्टरों ने ऐसी जटिल रोबोटिक हार्ट सर्जरी सफलतापूर्वक पूरी की है, जिसमें मरीज के सीने की हड्डी (ब्रेस्टबोन/स्टर्नम) को काटे बिना ही हृदय का वॉल्व बदला गया। इस अत्याधुनिक प्रक्रिया को चिकित्सा क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार यह उपलब्धि रोबोटिक कार्डियक सर्जरी के क्षेत्र में एक नया वैश्विक मानक स्थापित करती है।

पारंपरिक ओपन हार्ट सर्जरी में डॉक्टरों को हृदय तक पहुंचने के लिए मरीज की छाती के बीच की हड्डी को काटना पड़ता है। इसके कारण ऑपरेशन के बाद मरीज को लंबे समय तक दर्द, संक्रमण का खतरा और रिकवरी में कई सप्ताह का समय लग सकता है। लेकिन सफदरजंग अस्पताल की टीम ने अत्याधुनिक रोबोटिक मिनिमली इनवेसिव तकनीक का उपयोग करते हुए केवल छोटे-छोटे चीरे लगाकर पूरी प्रक्रिया को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। इससे मरीज की छाती की हड्डी सुरक्षित रही और शरीर पर बड़ा घाव भी नहीं बना।

विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह की रोबोटिक सर्जरी में उच्च गुणवत्ता वाले थ्री-डी कैमरे और रोबोटिक आर्म्स का उपयोग किया जाता है। सर्जन एक विशेष कंसोल पर बैठकर अत्यंत सूक्ष्म और सटीक तरीके से ऑपरेशन करते हैं। रोबोटिक सिस्टम हाथों की मामूली कंपन को भी नियंत्रित कर देता है, जिससे जटिल हृदय सर्जरी अधिक सटीक और सुरक्षित तरीके से की जा सकती है। यही कारण है कि दुनिया के कई विकसित देशों में भी इस तकनीक को भविष्य की कार्डियक सर्जरी माना जा रहा है।

अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि इस तकनीक का सबसे बड़ा लाभ मरीज को मिलता है। चूंकि सीने की हड्डी नहीं काटी जाती, इसलिए ऑपरेशन के बाद दर्द अपेक्षाकृत कम होता है, संक्रमण की संभावना घट जाती है, रक्तस्राव कम होता है और मरीज सामान्य जीवन में कहीं अधिक तेजी से लौट सकता है। साथ ही अस्पताल में भर्ती रहने की अवधि भी कम हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में इस तकनीक के जरिए और अधिक जटिल हृदय रोगों का उपचार भी संभव होगा।

सफदरजंग अस्पताल का कार्डियोथोरेसिक एवं वैस्कुलर सर्जरी (CTVS) विभाग पहले से ही रोबोटिक कार्डियक और थोरैसिक सर्जरी की सुविधा उपलब्ध करा रहा है। यह संस्थान देश के सबसे बड़े सरकारी अस्पतालों में से एक है और यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीजों का इलाज किया जाता है। अस्पताल का कहना है कि अत्याधुनिक रोबोटिक तकनीक को सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में शामिल करना मरीजों के लिए बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि इससे महंगे निजी अस्पतालों पर निर्भरता कम हो सकती है।

कार्डियक सर्जरी के क्षेत्र में रोबोटिक तकनीक का उपयोग पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ा है, लेकिन सरकारी अस्पताल में इस स्तर की जटिल प्रक्रिया का सफलतापूर्वक संपन्न होना चिकित्सा क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में इसी तकनीक का उपयोग हृदय की अन्य जटिल सर्जरी, जैसे बायपास, वाल्व रिपेयर और जन्मजात हृदय रोगों के उपचार में भी अधिक व्यापक रूप से किया जा सकेगा। इससे मरीजों की रिकवरी तेज होगी और उपचार की गुणवत्ता में भी सुधार आएगा।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में रोबोटिक सर्जरी लगातार नई ऊंचाइयों को छू रही है। हाल के वर्षों में देश के डॉक्टरों ने रोबोटिक कार्डियक और टेली-सर्जरी के क्षेत्र में कई उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। सफदरजंग अस्पताल की यह सफलता न केवल सरकारी चिकित्सा व्यवस्था की क्षमता को दर्शाती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि भारतीय डॉक्टर अत्याधुनिक तकनीक के माध्यम से विश्वस्तरीय उपचार उपलब्ध कराने में सक्षम हैं। इस उपलब्धि से भविष्य में देशभर के सरकारी अस्पतालों में रोबोटिक सर्जरी को बढ़ावा मिलने की उम्मीद भी बढ़ गई है।

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