पाकिस्तान ने तालिबान से लगाई गुहार, अफगान जमीन से हमले रोकने की मांग, इशाक डार ने दी चेतावनी

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पाकिस्तान ने तालिबान से की आतंकियों पर कार्रवाई की अपील, सीमा पार हमलों को लेकर बढ़ा तनाव

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा पार आतंकवादी हमलों को लेकर तनाव एक बार फिर गहरा गया है। पाकिस्तान ने अफगानिस्तान की तालिबान सरकार से अपील की है कि वह अपनी जमीन का इस्तेमाल पाकिस्तान के खिलाफ हमले करने वाले सशस्त्र समूहों को न करने दे और उनके खिलाफ ठोस कार्रवाई करे। पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने चेतावनी दी है कि अगर अफगानिस्तान की सरकार इन समूहों पर लगाम लगाने में नाकाम रही, तो भविष्य में यही संगठन तालिबान शासन के लिए भी खतरा बन सकते हैं।

यह अपील ऐसे समय आई है जब दोनों पड़ोसी देशों के बीच सीमा पर झड़पों, हवाई हमलों और आतंकवादी गतिविधियों को लेकर लगातार तनाव बना हुआ है। पाकिस्तान का आरोप है कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) और कुछ अन्य सशस्त्र संगठन अफगानिस्तान की धरती का इस्तेमाल कर पाकिस्तान में हमलों की योजना बनाते हैं। हालांकि, अफगानिस्तान की तालिबान सरकार इन आरोपों को खारिज करती रही है और कहती है कि वह पाकिस्तान के खिलाफ काम करने वाले समूहों को सुरक्षित पनाह नहीं देती।

इशाक डार ने तालिबान सरकार को क्या चेतावनी दी?

पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने 12 अक्टूबर को इस्लामाबाद में एक कार्यक्रम के दौरान अफगानिस्तान की तालिबान सरकार से आतंकवादी समूहों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अपने पड़ोसी देश में स्थिरता और समृद्धि चाहता है, लेकिन सीमा पार से होने वाले हमलों को लगातार नजरअंदाज नहीं कर सकता।

डार के मुताबिक, उन्होंने जुलाई 2025 में काबुल की यात्रा के दौरान अफगानिस्तान के प्रधानमंत्री मुल्ला मोहम्मद हसन अखुंद को भी इस मुद्दे पर चेताया था। उन्होंने कहा था कि यदि अफगान अधिकारी अपनी जमीन से काम करने वाले आतंकवादी समूहों के खिलाफ प्रभावी कदम नहीं उठाते, तो एक दिन यही संगठन तालिबान सरकार के लिए भी खतरा पैदा कर सकते हैं।

डार ने पाकिस्तान की चिंता जाहिर करते हुए कहा कि अच्छे पड़ोसी संबंधों की जिम्मेदारी दोनों देशों की होती है। उनके अनुसार, इन संबंधों का मतलब यह नहीं हो सकता कि पाकिस्तान सीमा पार से होने वाले हमलों को बिना प्रतिक्रिया के सहता रहे।

पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने आरोप लगाया कि हमलों की योजना सीमा पार बनाई जाती है, हमलावर पहाड़ी रास्तों से घुसपैठ करते हैं और सुरक्षा बलों तथा आम नागरिकों को निशाना बनाने के बाद वापस अपने ठिकानों पर लौट जाते हैं। ये पाकिस्तान सरकार के आरोप हैं। इन दावों पर अफगानिस्तान की ओर से अलग रुख अपनाया जाता रहा है और दोनों पक्षों के बीच इस मुद्दे पर सहमति नहीं बन पाई है।

पाकिस्तान का दावा, इस साल 2,800 से ज्यादा हमले हुए

पाकिस्तान सरकार का कहना है कि इस साल जनवरी से अब तक देश में 2,800 से अधिक आतंकवादी हमले हुए हैं, जिनमें लगभग 300 लोग मारे गए या घायल हुए। पाकिस्तानी अधिकारियों ने इन हमलों के लिए अफगानिस्तान में मौजूद सशस्त्र समूहों को जिम्मेदार ठहराया है।

हालांकि, इस आंकड़े को पाकिस्तान सरकार की ओर से पेश किए गए दावे के रूप में समझना चाहिए। हर हमले की जिम्मेदारी, उसमें शामिल संगठन और सीमा पार से उसके संचालन का निर्धारण संबंधित जांच तथा स्वतंत्र रूप से सत्यापित तथ्यों के आधार पर ही किया जा सकता है।

पाकिस्तान में हाल के वर्षों में सुरक्षा बलों, पुलिस, सरकारी प्रतिष्ठानों और आम नागरिकों पर हमलों को लेकर चिंता बढ़ी है। विशेष रूप से खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान जैसे क्षेत्रों में सशस्त्र समूहों की गतिविधियां सुरक्षा व्यवस्था के लिए चुनौती बनी हुई हैं।

पाकिस्तान सरकार का आरोप है कि TTP के लड़ाके अफगानिस्तान में मौजूद ठिकानों से भर्ती, प्रशिक्षण और हमलों की योजना बनाने जैसी गतिविधियां करते हैं। इस्लामाबाद का कहना है कि जब तक इन ठिकानों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं होती, तब तक पाकिस्तान में हिंसा को पूरी तरह रोकना मुश्किल होगा।

अफगान तालिबान इस आरोप को स्वीकार नहीं करता कि उसकी सरकार पाकिस्तान पर हमले करने वाले समूहों को जानबूझकर सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराती है। यही असहमति दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों को प्रभावित कर रही है।

TTP को पाकिस्तान अपनी सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा क्यों मानता है?

तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान, जिसे TTP कहा जाता है, पाकिस्तान में सक्रिय एक सशस्त्र संगठन है। यह अफगानिस्तान की सत्ता पर काबिज तालिबान से अलग संगठन है, हालांकि दोनों के बीच वैचारिक और अन्य संबंध बताए जाते हैं।

पाकिस्तान सरकार TTP को देश की सुरक्षा के लिए सबसे गंभीर खतरों में से एक मानती है। पाकिस्तानी अधिकारियों के अनुसार, इस संगठन ने स्कूलों, मस्जिदों, बाजारों और सुरक्षा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाकर हमले किए हैं।

TTP की गतिविधियों के कारण पाकिस्तान और अफगानिस्तान के संबंधों में भी तनाव बढ़ा है। इस्लामाबाद का कहना है कि अफगानिस्तान की तालिबान सरकार को अपनी जमीन पर मौजूद TTP के ठिकानों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। पाकिस्तान का आरोप है कि समूह को अफगान क्षेत्र में मौजूदगी और गतिविधियों का फायदा मिलता है।

अफगान तालिबान की ओर से इन आरोपों को खारिज किए जाने के कारण दोनों देशों के बीच इस मुद्दे पर कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। पाकिस्तान चाहता है कि काबुल उसकी सुरक्षा चिंताओं को गंभीरता से ले, जबकि अफगानिस्तान अपनी संप्रभुता और पाकिस्तान की ओर से लगाए गए आरोपों पर अलग रुख रखता है।

इस विवाद का असर केवल दोनों देशों की सुरक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं है। सीमा पर तनाव बढ़ने से व्यापार, लोगों की आवाजाही और सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले नागरिकों की सुरक्षा भी प्रभावित हो सकती है।

BLA और अन्य संगठनों पर भी पाकिस्तान ने लगाए आरोप

पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने केवल TTP का उल्लेख नहीं किया, बल्कि बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) और अल-कायदा से जुड़े समूहों को लेकर भी चिंता जताई। पाकिस्तान का आरोप है कि इन संगठनों की गतिविधियां देश की सुरक्षा और आर्थिक ढांचे के लिए खतरा पैदा करती हैं।

BLA बलूचिस्तान में सक्रिय अलगाववादी सशस्त्र संगठन है। पाकिस्तानी सरकार इस पर सुरक्षा कर्मियों, आम नागरिकों और आर्थिक परियोजनाओं को निशाना बनाने के आरोप लगाती रही है। इस्लामाबाद का कहना है कि क्षेत्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ऐसे समूहों के खिलाफ कार्रवाई जरूरी है।

पाकिस्तान ने यह भी आरोप लगाया है कि कुछ सशस्त्र समूह अफगानिस्तान में मौजूद ठिकानों का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, किसी संगठन की मौजूदगी, किसी विशेष हमले में उसकी भूमिका और किसी सरकार की कथित सहायता जैसे अलग-अलग दावों को अलग-अलग जांचना आवश्यक है।

पाकिस्तान की मांग है कि अफगानिस्तान अपनी जमीन का इस्तेमाल पड़ोसी देश के खिलाफ हमलों के लिए नहीं होने दे। वहीं, अफगान तालिबान इन आरोपों को खारिज करता है। दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का यह सिलसिला लंबे समय से जारी है।

2,600 किलोमीटर से लंबी सीमा पर बाड़ लगाने का दावा

इशाक डार ने अपने संबोधन में पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा पर बाड़ लगाने के काम का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक, पाकिस्तान ने 2,600 किलोमीटर से अधिक लंबी सीमा पर लगभग 95 प्रतिशत बाड़ लगाने का काम पूरा कर लिया है।

पाकिस्तान ने यह परियोजना 2017 में शुरू की थी। इसका उद्देश्य सीमा पार घुसपैठ और सशस्त्र समूहों की आवाजाही को रोकना था। दोनों देशों के बीच लंबी और दुर्गम सीमा होने के कारण निगरानी करना चुनौतीपूर्ण माना जाता है।

पाकिस्तानी अधिकारियों का कहना है कि सीमा पर बाड़ और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के बावजूद घुसपैठ की कोशिशें होती रहती हैं। डार ने आरोप लगाया कि हमलावर पहाड़ी इलाकों का फायदा उठाकर पाकिस्तान में प्रवेश करते हैं और फिर हमले के बाद सीमा पार लौट जाते हैं।

लेकिन सीमा पर बाड़ लगाने से जुड़ा विवाद केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है। अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमा निर्धारण तथा सीमा पर नियंत्रण को लेकर ऐतिहासिक मतभेद भी रहे हैं। इसी कारण सीमा से जुड़े घटनाक्रम दोनों देशों के बीच संवेदनशील राजनीतिक मुद्दा बन जाते हैं।

कूटनीतिक प्रयासों से भी नहीं निकला समाधान

इशाक डार ने कहा कि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के साथ संबंध बेहतर बनाने के लिए कूटनीतिक और आर्थिक स्तर पर कई प्रयास किए हैं। उनके अनुसार, वर्ष 2025 में उन्होंने तीन बार काबुल का दौरा किया था। पाकिस्तान ने व्यापार बढ़ाने, राजनयिक प्रतिनिधित्व मजबूत करने और क्षेत्रीय संपर्क परियोजनाओं पर भी काम करने की कोशिश की।

डार ने अफगानिस्तान के रास्ते पाकिस्तान को मध्य एशिया से जोड़ने वाली रेल परियोजना का भी उल्लेख किया। ऐसी परियोजनाओं से क्षेत्रीय व्यापार और आर्थिक संपर्क को बढ़ावा मिल सकता है, लेकिन सुरक्षा संबंधी विवादों के कारण सहयोग आगे बढ़ाना कठिन हो सकता है।

पाकिस्तान का कहना है कि आर्थिक संबंधों को मजबूत बनाने के लिए सुरक्षा सहयोग भी जरूरी है। इस्लामाबाद की मांग है कि अफगानिस्तान उन समूहों के खिलाफ कार्रवाई करे जिन्हें पाकिस्तान सीमा पार हमलों के लिए जिम्मेदार मानता है।

डार के मुताबिक, पाकिस्तान एक स्थिर और समृद्ध अफगानिस्तान चाहता है, लेकिन अपनी सुरक्षा चिंताओं को अनदेखा नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि पड़ोसी देशों के बीच अच्छे संबंध बनाए रखने के लिए दोनों पक्षों को जिम्मेदारी निभानी होगी।

हालांकि, अब तक पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच इस मुद्दे पर कोई ऐसा स्थायी समाधान सामने नहीं आया है जो सीमा पार हिंसा को पूरी तरह रोक सके। लगातार

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