ऊंट के मुंह में जीरा! गाजा को आबाद करने के लिए ट्रंप ने जोड़े इतने अरब डॉलर, समझें- नाकाफी क्यों गाजा में शांति बहाली के लिए बोर्ड ऑफ पीस की पहली बैठक… https://www.aajtak.in/world/story/donald-trump-board-of-peace-gaza-package-us-ntc-rttm-dskc-2474124-2026-02-19

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गाजा में लंबे समय से जारी संघर्ष और तबाही के बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की पहली बैठक में पुनर्निर्माण के लिए अरबों डॉलर के पैकेज का ऐलान किया। इस घोषणा को शांति बहाली की दिशा में बड़ा कदम बताया गया, लेकिन कई विशेषज्ञ इसे “ऊंट के मुंह में जीरा” मान रहे हैं।


क्या है प्रस्तावित पैकेज?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रस्तावित फंड का उद्देश्य गाजा में बुनियादी ढांचे की मरम्मत, आवास निर्माण, स्वास्थ्य सेवाओं और बिजली-पानी की व्यवस्था को बहाल करना है।

हालांकि, सटीक राशि और उसके वितरण की विस्तृत रूपरेखा अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।


क्यों उठ रहे हैं सवाल?

1️⃣ तबाही का पैमाना
गाजा में कई दौर के संघर्ष के बाद बड़ी संख्या में इमारतें, सड़कें और सार्वजनिक संस्थान क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। अनुमान है कि पुनर्निर्माण में दर्जनों अरब डॉलर की जरूरत होगी।

2️⃣ दीर्घकालिक स्थिरता का मुद्दा
सिर्फ आर्थिक पैकेज पर्याप्त नहीं होता, जब तक सुरक्षा, प्रशासन और राजनीतिक स्थिरता सुनिश्चित न हो।

3️⃣ वितरण और निगरानी
फंड के पारदर्शी उपयोग और निगरानी की व्यवस्था भी एक बड़ी चुनौती है।


बोर्ड ऑफ पीस की भूमिका

‘बोर्ड ऑफ पीस’ को क्षेत्र में स्थायी समाधान और विकास योजनाओं के समन्वय के लिए बनाया गया बताया जा रहा है। इसका उद्देश्य विभिन्न अंतरराष्ट्रीय पक्षों को एक मंच पर लाकर सहयोग बढ़ाना है।

लेकिन आलोचकों का कहना है कि बिना व्यापक राजनीतिक समझौते के आर्थिक पैकेज सीमित असर ही डाल पाएगा।


क्षेत्रीय और वैश्विक राजनीति

गाजा मुद्दा लंबे समय से वैश्विक कूटनीति का केंद्र रहा है। किसी भी पुनर्निर्माण योजना में क्षेत्रीय देशों, अंतरराष्ट्रीय संगठनों और स्थानीय प्रशासन की भूमिका अहम होती है।

विश्लेषकों का मानना है कि आर्थिक सहायता तभी प्रभावी होगी, जब इसके साथ राजनीतिक समाधान की ठोस पहल भी हो।


निष्कर्ष

डोनाल्ड ट्रंप द्वारा घोषित अरबों डॉलर का पैकेज गाजा में राहत और पुनर्निर्माण की दिशा में एक पहल है, लेकिन तबाही के विशाल पैमाने को देखते हुए इसे अपर्याप्त माना जा रहा है।

आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि यह पहल जमीनी स्तर पर कितना असर डाल पाती है और क्या इससे क्षेत्र में स्थायी शांति की राह बनती है।

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