उमर खालिद की डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग पर रोक, CBFC की आपत्ति के बाद IIIT हैदराबाद में कार्यक्रम रद्द

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उमर खालिद पर बनी डॉक्यूमेंट्री की प्रस्तावित स्क्रीनिंग को लेकर एक बार फिर विवाद सामने आया है। तेलंगाना स्थित इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, हैदराबाद यानी IIIT-H में 18 सितंबर को होने वाली डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग रद्द कर दी गई। यह फैसला केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड यानी CBFC की आपत्ति के बाद सामने आया। बोर्ड ने कहा कि बिना प्रमाणन वाली फिल्म का सार्वजनिक प्रदर्शन सिनेमैटोग्राफ कानून के तहत अनुमति योग्य नहीं है, जब तक कि उसके लिए कानून के तहत विशेष छूट हासिल न की गई हो।

जिस डॉक्यूमेंट्री को लेकर विवाद हुआ है, उसका नाम ‘Prisoner No. 626710 is Present’ है। फिल्म का निर्देशन फिल्ममेकर ललित वचानी ने किया है और यह उमर खालिद की गिरफ्तारी तथा उनके जेल में रहने की स्थिति पर केंद्रित है। इसे IIIT हैदराबाद के KRB ऑडिटोरियम में शुक्रवार शाम 8 बजे दिखाने की योजना बनाई गई थी। कार्यक्रम की तैयारी एक स्वतंत्र छात्र समूह की ओर से की गई थी।

CBFC ने क्यों जताई आपत्ति?

CBFC ने 17 सितंबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए प्रस्तावित स्क्रीनिंग को लेकर आपत्ति जताई। बोर्ड के मुताबिक, ऐसी डॉक्यूमेंट्री जिसे अभी तक CBFC से प्रमाण पत्र नहीं मिला है, उसका सार्वजनिक प्रदर्शन सिनेमैटोग्राफ एक्ट का उल्लंघन हो सकता है, जब तक कि कानून के तहत विशेष छूट प्राप्त न की गई हो।

CBFC ने अपनी पोस्ट में IIIT हैदराबाद को भी टैग किया और संस्थान के अधिकारियों से मामले पर ध्यान देने तथा आवश्यक कार्रवाई करने को कहा। इसके बाद संस्थान की ओर से छात्रों को इस कार्यक्रम के संबंध में सूचना दी गई और स्क्रीनिंग तथा ऑडिटोरियम की बुकिंग रद्द कर दी गई।

यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार CBFC की आपत्ति फिल्म की सामग्री पर किसी अंतिम प्रमाणन आदेश के रूप में सामने नहीं आई थी। तत्काल विवाद मुख्य रूप से इस बात को लेकर था कि फिल्म को प्रमाणन मिले बिना सार्वजनिक रूप से दिखाने की योजना बनाई गई थी।

IIIT हैदराबाद ने क्या कहा?

CBFC की आपत्ति के बाद IIIT हैदराबाद प्रशासन ने भी इस आयोजन से दूरी स्पष्ट की। संस्थान ने कहा कि न तो IIIT-H ने और न ही उसके किसी मान्यता प्राप्त छात्र क्लब, सेल या संगठन ने ऐसी किसी फिल्म की स्क्रीनिंग आयोजित या होस्ट की थी, जिसे CBFC से प्रमाणन नहीं मिला है।

संस्थान ने यह भी कहा कि उसके कैंपस में आधिकारिक कार्यक्रमों और गतिविधियों के लिए निर्धारित प्रक्रियाएं हैं। प्रशासन के मुताबिक, किसी अनधिकृत या असंबंधित गतिविधि को संस्थान या उसके मान्यता प्राप्त छात्र संगठनों से जोड़ना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा।

IIIT हैदराबाद ने अपने बयान में यह भी कहा कि उसके परिसर में छात्रों और शिक्षकों का एक विविध समुदाय है और वे व्यक्तिगत क्षमता में अलग-अलग लोगों से मिल सकते हैं। ऐसी व्यक्तिगत मुलाकातों या बातचीत को संस्थान की ओर से आयोजित कार्यक्रम या संस्थान के आधिकारिक विचार के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

छात्रों को भेजे गए ईमेल में क्या कहा गया?

संस्थान के निदेशक संदीप कुमार शुक्ला की ओर से छात्रों को भेजे गए ईमेल में कहा गया कि बिना आवश्यक अनुमति के फिल्म की स्क्रीनिंग की घोषणा की गई थी। रिपोर्टों के मुताबिक, KRB ऑडिटोरियम की बुकिंग भी रद्द कर दी गई।

ईमेल में यह भी कहा गया कि भविष्य में इस तरह के किसी कार्यक्रम को आयोजित करने या सोशल मीडिया पर सार्वजनिक रूप से घोषित करने से पहले संबंधित अधिकारियों से लिखित अनुमति लेनी होगी। संस्थान ने यह स्पष्ट किया कि कैंपस के किसी भी संस्थागत स्थान पर बिना निर्धारित अनुमति के ऐसी स्क्रीनिंग नहीं की जाएगी।

रिपोर्टों के अनुसार, निदेशक ने यह भी स्पष्ट किया कि बिना प्रमाणित फिल्म की सार्वजनिक या निजी स्क्रीनिंग संस्थान की प्रयोगशाला, कक्षा या कार्यालय जैसे स्थानों में भी नहीं होने दी जाएगी।

किस डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग होनी थी?

‘Prisoner No. 626710 is Present’ फिल्म ललित वचानी की डॉक्यूमेंट्री है। इसका केंद्र उमर खालिद हैं, जो जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र और शोधार्थी रहे हैं।

खालिद को सितंबर 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों से जुड़े एक मामले में गिरफ्तार किया गया था। उन पर गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम यानी UAPA समेत कई कानूनी प्रावधानों के तहत आरोप लगाए गए हैं। वे गिरफ्तारी के बाद से हिरासत में हैं। इन मामलों में लगाए गए आरोपों को अदालत में तय होना बाकी है।

डॉक्यूमेंट्री का नाम उनके जेल कैदी नंबर 626710 से जुड़ा है। फिल्म का उद्देश्य और दृष्टिकोण उसके निर्माताओं और आयोजकों से संबंधित है, जबकि उमर खालिद के खिलाफ लंबित कानूनी मामलों में अंतिम न्यायिक निष्कर्ष अलग विषय है।

‘पॉलिटिकल प्रिजनर्स डे’ से जोड़ी गई थी स्क्रीनिंग

छात्र आयोजकों ने इस स्क्रीनिंग को ‘Political Prisoners’ Day’ के संदर्भ में आयोजित करने की योजना बनाई थी। कार्यक्रम के निमंत्रण में उमर खालिद की गिरफ्तारी के छह साल पूरे होने का भी उल्लेख किया गया था।

निमंत्रण में स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े जतिंद्र नाथ दास की पुण्यतिथि का भी जिक्र था। जतिंद्र नाथ दास की 1929 में लाहौर जेल में लंबी भूख हड़ताल के बाद मृत्यु हुई थी। इस तरह कार्यक्रम को ऐतिहासिक और समकालीन राजनीतिक संदर्भों से जोड़ने की योजना थी।

हालांकि, स्क्रीनिंग कैंपस में आयोजित होने से पहले ही रद्द कर दी गई और फिल्म को उस निर्धारित कार्यक्रम के तहत IIIT-H में नहीं दिखाया गया।

मामला सिर्फ फिल्म तक सीमित नहीं

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर विश्वविद्यालय परिसरों में फिल्मों, राजनीतिक विषयों और सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए अनुमति और नियामकीय प्रक्रियाओं को लेकर चर्चा शुरू कर दी है।

एक तरफ CBFC का कहना है कि बिना प्रमाणन वाली फिल्म का सार्वजनिक प्रदर्शन कानून के अनुरूप नहीं है। दूसरी तरफ, विश्वविद्यालय परिसरों में फिल्म स्क्रीनिंग को लेकर छात्र संगठनों की ओर से अकादमिक चर्चा, अभिव्यक्ति और बहस की जरूरत का मुद्दा उठाया जाता रहा है।

हालांकि, IIIT हैदराबाद के मामले में संस्थान ने स्वयं स्पष्ट किया है कि प्रस्तावित कार्यक्रम उसके आधिकारिक आयोजन का हिस्सा नहीं था। इसलिए इसे संस्थान की आधिकारिक नीति या विचार के रूप में प्रस्तुत करना सही नहीं होगा।

बेंगलुरु के NLSIU में भी टली थी स्क्रीनिंग

इसी डॉक्यूमेंट्री को लेकर कुछ दिन पहले बेंगलुरु स्थित नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी यानी NLSIU में भी एक प्रस्तावित स्क्रीनिंग टाल दी गई थी।

वह कार्यक्रम 14 सितंबर को आयोजित किया जाना था और इसे वहां की छात्र संचालित Law and Society Committee ने आयोजित करने की योजना बनाई थी। रिपोर्टों के अनुसार, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद यानी ABVP ने इस स्क्रीनिंग का विरोध किया था और इसे कैंपस के राजनीतिक प्रचार से जोड़ते हुए रद्द करने की मांग की थी।

इसके बाद छात्र समिति ने स्क्रीनिंग को ‘लॉजिस्टिक और सुरक्षा संबंधी कारणों’ का हवाला देते हुए स्थगित कर दिया। समिति ने कहा था कि कार्यक्रम को बाद में आयोजित किया जाएगा और उसका स्थगन किसी बाहरी दबाव के कारण नहीं किया गया।

इस तरह एक ही डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग को लेकर कुछ ही दिनों के भीतर दो प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों में घटनाक्रम सामने आया है।

CBFC प्रमाणन को लेकर क्या नियम है?

भारत में सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए फिल्मों के प्रमाणन की व्यवस्था सिनेमैटोग्राफ कानून के तहत की गई है। CBFC इसी व्यवस्था के तहत फिल्मों को प्रमाणित करता है। बोर्ड ने IIIT-H मामले में इसी कानूनी प्रावधान का हवाला दिया।

CBFC का कहना है कि यदि किसी फिल्म को अभी तक प्रमाण पत्र नहीं मिला है, तो उसका सार्वजनिक प्रदर्शन नहीं किया जा सकता, जब तक कि कानून में उपलब्ध किसी विशेष छूट का इस्तेमाल न किया गया हो।

हालांकि, फिल्म की सार्वजनिक स्क्रीनिंग और सीमित निजी प्रदर्शन के बीच कानूनी अंतर को लेकर भी चर्चा होती रही है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, प्रमाणन की प्रक्रिया में देरी होने की स्थिति में फिल्म निर्माता छोटे समूहों के सामने निजी प्रदर्शन करते रहे हैं। लेकिन IIIT-H के मामले में प्रस्तावित कार्यक्रम सार्वजनिक रूप से घोषित किया गया था और संस्थान के परिसर में होना था, इसलिए CBFC ने सार्वजनिक प्रदर्शन के नियम का मुद्दा उठाया।

विवाद के बीच आगे क्या?

फिलहाल IIIT हैदराबाद में ‘Prisoner No. 626710 is Present’ की प्रस्तावित स्क्रीनिंग रद्द हो चुकी है। संस्थान ने इस आयोजन से अपनी आधिकारिक दूरी स्पष्ट कर दी है और CBFC ने बिना प्रमाणन वाली फिल्म के सार्वजनिक प्रदर्शन को लेकर कानूनी स्थिति सामने रखी है।

दूसरी ओर, डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग को लेकर कैंपसों में होने वाली बहस केवल इस एक कार्यक्रम तक सीमित नहीं है। यह मामला फिल्म प्रमाणन, विश्वविद्यालयों में छात्र गतिविधियों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कैंपस कार्यक्रमों के लिए अनुमति जैसी कई अलग-अलग बातों को एक साथ सामने लाता है।

इस मामले में फिलहाल इतना स्पष्ट है कि IIIT हैदराबाद में प्रस्तावित स्क्रीनिंग निर्धारित समय पर नहीं हुई। CBFC की आपत्ति का आधार फिल्म का प्रमाणित न होना था, जबकि संस्थान ने कहा कि कार्यक्रम उसकी ओर से आयोजित या उसके मान्यता प्राप्त छात्र संगठनों द्वारा आधिकारिक रूप से आयोजित नहीं किया गया था।

आगे इस डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग किसी दूसरे स्थान या किसी अन्य शैक्षणिक संस्थान में होती है या नहीं, यह उसके प्रमाणन की स्थिति और आयोजकों द्वारा अपनाई जाने वाली कानूनी तथा संस्थागत प्रक्रियाओं पर निर्भर करेगा।

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