होर्मुज हमले के बाद सदमे में नाविक पहुंचे कोर्ट, बोले- ‘अब हर आहट से डर लगता है’; कंपनी से मांगा 10 लाख थाई बाट का मुआवजा

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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में हुए जानलेवा हमले से बच निकले तीन थाई नाविक अब न्याय की मांग को लेकर अदालत पहुंच गए हैं। इन नाविकों ने अपनी पूर्व नियोक्ता कंपनी प्रेशियस शिपिंग (Precious Shipping), उससे जुड़ी दो अन्य कंपनियों और जहाज के कप्तान के खिलाफ बैंकॉक की सेंट्रल लेबर कोर्ट में मुकदमा दायर किया है। उनका आरोप है कि कंपनी ने क्षेत्र में पहले से मौजूद गंभीर सुरक्षा खतरे के बावजूद जहाज को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने का आदेश दिया, जिससे चालक दल की जान जोखिम में पड़ गई। नाविकों का कहना है कि इस हमले के बाद उनकी मानसिक स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि वे अब दोबारा समुद्र में काम करने की स्थिति में नहीं हैं।

यह मामला थाई ध्वज वाले मालवाहक जहाज ‘मायूरी नारी’ (Mayuree Naree) से जुड़ा है। 11 मार्च 2026 को यह जहाज ओमान के उत्तर में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजर रहा था, तभी उस पर दो प्रोजेक्टाइल से हमला हुआ। इस हमले में चालक दल के तीन सदस्यों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि शेष 20 लोगों को बाद में सुरक्षित बचा लिया गया। यह घटना उस समय हुई जब पश्चिम एशिया में सैन्य तनाव अपने चरम पर था और होर्मुज क्षेत्र वैश्विक समुद्री सुरक्षा के लिए सबसे संवेदनशील इलाकों में गिना जा रहा था।

मुकदमा दायर करने वाले तीनों नाविकों—पनिथी तुमकाएव, नोप्पाडोन वोंगसुवान और सुरदेस मानपुएन—का कहना है कि हमले के बाद उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल गई है। उनका दावा है कि वे पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD) से पीड़ित हैं। एक नाविक ने अदालत के बाहर मीडिया से बातचीत में कहा, “अब कोई भी तेज आवाज या मामूली आहट सुनते ही मैं घबरा जाता हूं। मैं सामान्य जीवन नहीं जी पा रहा हूं और लगातार दवाइयां लेनी पड़ रही हैं।” उनका कहना है कि मानसिक आघात के कारण वे भविष्य में समुद्री नौकरी करने में सक्षम नहीं हैं।

नाविकों के वकील कुनपत सिंहाथोंग के अनुसार, कंपनी को पहले ही क्षेत्र में बढ़ते सुरक्षा जोखिमों की जानकारी थी। इसके बावजूद जहाज को उसी मार्ग से भेजा गया। उनका आरोप है कि जहाज पर हमला होने के बाद वह संचालन योग्य नहीं रहा और कंपनी ने नौ महीने का अनुबंध पूरा होने से पहले ही तीनों कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दीं। वकील का कहना है कि प्रभावित कर्मचारियों को केवल दो महीने के वेतन और कुछ व्यक्तिगत सामान के नुकसान की भरपाई दी गई, जो उनके अनुसार पूरी तरह अपर्याप्त है।

तीनों नाविक अदालत से प्रत्येक के लिए 10 लाख थाई बाट (लगभग 30 हजार अमेरिकी डॉलर) से अधिक मुआवजे की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह केवल आर्थिक नुकसान का मामला नहीं है, बल्कि मानसिक पीड़ा, रोजगार छिनने और भविष्य की आजीविका पर पड़े प्रभाव का भी मामला है। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया है कि कंपनी की कथित लापरवाही को देखते हुए उचित क्षतिपूर्ति दिलाई जाए।

वकील ने यह भी बताया कि अदालत जाने से पहले कंपनी के साथ बातचीत कर विवाद सुलझाने की कोशिश की गई थी, लेकिन कंपनी ने पूरी जिम्मेदारी स्वीकार करने से इनकार कर दिया। इसके बाद श्रम न्यायालय का दरवाजा खटखटाने का फैसला लिया गया। दूसरी ओर, प्रेशियस शिपिंग ने अदालत में दायर दावों पर विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। हालांकि कंपनी पहले जारी एक बयान में मृत नाविकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त कर चुकी है और प्रभावित परिवारों को सहायता देने की बात कह चुकी है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज विश्व के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) का लगभग पांचवां हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। हाल के महीनों में पश्चिम एशिया में बढ़े सैन्य तनाव के कारण इस क्षेत्र में जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं लगातार बढ़ी हैं। भारत, थाईलैंड, फिलीपींस और अन्य एशियाई देशों के हजारों नाविक इस समुद्री मार्ग पर काम करते हैं, जिससे यह मुद्दा केवल एक कंपनी या एक देश तक सीमित नहीं रह जाता।

संयुक्त राष्ट्र की अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) ने भी हाल ही में कहा है कि समुद्री संघर्षों की सबसे बड़ी कीमत आम नाविक और उनके परिवार चुका रहे हैं। संगठन ने समुद्री मार्गों पर काम करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुकदमा भविष्य में समुद्री कंपनियों की जिम्मेदारियों, कर्मचारियों की सुरक्षा और युद्ध प्रभावित क्षेत्रों में जहाजों के संचालन से जुड़े कानूनी मानकों को प्रभावित कर सकता है।

फिलहाल बैंकॉक की सेंट्रल लेबर कोर्ट ने याचिका स्वीकार कर मामले की सुनवाई शुरू करने पर सहमति जताई है। अब अदालत यह तय करेगी कि क्या कंपनी ने सुरक्षा संबंधी पर्याप्त सावधानियां बरती थीं और क्या प्रभावित नाविक अतिरिक्त मुआवजे के हकदार हैं। इस मुकदमे का फैसला न केवल इन तीन नाविकों के लिए महत्वपूर्ण होगा, बल्कि वैश्विक समुद्री उद्योग में कार्यरत हजारों कर्मचारियों के अधिकारों और सुरक्षा मानकों के लिए भी एक अहम मिसाल बन सकता है।

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